अगर 90 हजार करोड रुपए सरकार रोजगार पैदा करने के क्षेत्र में लगाएगी तो उस से देश की बेरोजगारी कम होगी और हर साल काम होती ही जाएगी, हर राज्य में बड़े बड़े सरकारी अस्पताल बन सकेंगे, देश में आलीशान सड़कों का निर्माण हो सकेगा, सरकारी स्कूल कॉलेज और यूनिवर्सिटी और ज्यादा खुल सकेंगे और धीरे-धीरे देश का समुचित विकास होगा. किसान को उसकी उत्पाद का जब पैसा मिलेगा तो उसे सरकार से मिलने वाली भीख की जरूरत नहीं होगी. बेरोजगारों के पास अगर काम होगा नियमित वेतन होगी उन्हें सरकारी योजनाओं के तहत मिलने वाले 500 और 1500 रु प्रति महीने के भीख की जरूरत नहीं होगी. जो इंसान खुद कमाता है फ्री के वाईफाई का इंतजार नहीं करेगा.
दरअसल यह सोचने की बात है सोचना हमें और आपको ही पड़ेगा कि सरकार जनता का पैसा जनता में ही बांट रही है लेकिन क्या उसका इस्तेमाल सही जगह पर हो रहा है? जिस तरह से मोदी सरकार ने किसानों के खाते में सीधे 6000 पहुंचाने की बात की है और जिस तरह से असंगठित मजदूरों के खाते में 500 और 1500 रुपए हर महीने पहुंचाने की बात की है, यह सब कुछ किस लिए हो रहा है? देश में किसानों की संख्या और असंगठित मजदूरों की संख्या बहुत बड़ी है और यह सीधे-सीधे वोट बैंक की राजनीति नहीं तो और क्या है?
चुनाव के समय पैसा बांट कर वोट मांगना हो या चुनाव से पहले उपहार बांटना या फिर लोगों को उपहार का लालच देना ये सब क्या है? ऐसा नहीं है कि सिर्फ मोदी सरकार ही इस बंदरबांट में लगी है बल्कि चुनावों में भी देखने को मिला है कि अन्य पार्टियां भी अब इसी रास्ते को अपनाती हुई नजर आ रही हैं. पंजाब चुनाव के वक्त शिरोमणि अकाली दल 18 साल से ऊपर की महिलाओं को 2 हजार रु प्रतिमाह देने का वादा किया था, आम आदमी पार्टी ने 1 हजार रु प्रतिमाह देने का वादा किया था, वहीं कांग्रेस ने महिलाओं को 2 हजार रु प्रति महीना देने के साथ-साथ साल भर में 8 सिलेंडर मुफ्त देने का वादा किया था, साथ ही यह भी कहा था कि 12वीं पास लड़की को 20 हजार रु दिए जाएंगे, 10 पास करने के बाद लड़कियों को 10 हजार रु दिए जाएंगे, कॉलेज जाने वाली लड़कियों को स्कूटी दिया जाएगा, यूपी में कांग्रेस ने वादा किया कि 12वीं में पढ़ रही लड़कियों को स्मार्टफोन और कॉलेज जाने वाली लड़कियों को स्कूटी दी जाएगी, समाजवादी पार्टी ने वादा किया कि महिलाओं को 15 सौ रुपए पेंसन और हर परिवार को 300 यूनिट बिजली प्रति महीने फ्री दी जाएगी तो यह पैसों का लालच देकर वोट मांगना नहीं हुआ तो क्या हुआ ?
पैसा बांटकर वोट मांगना या चुनाव से पहले उपहार बांटना निर्वाचन आयोग के नियमों का उललंघन तो है ही इसे भारतीय दंड संहिता में भी अपराध की श्रेणी में रखा गया है. फिर भी धड़ल्ले से देश में मौजूद सब राजनीतिक पार्टी उन नियमों को ताक पर रख के अपना उल्लू सीधा करने में लगे हुए हैं. आईपीसी की धारा 171ए से लेकर 171आई तक में चुनाव अपराध से संबंधित प्रावधान हैं. आईपीसी की धारा 171 बी में वोट के लिए रिश्वत, चुनाव में गैर कानूनी तरीके से प्रभावित करने के मामले में आईपीसी की धारा 171 सी का प्रावधान है. इसी तरह गलत बयान देने के लिए आईपीसी में 171 जी में सजा का प्रावधान है. साथ ही अवैध तरीके से पेमेंट करने के मामले को भी अपराध बताया गया है. लेकिन इन तमाम मामलों में कुछ में अधिकतम सजा का प्रावधान एक साल या जुर्माना है और ये मामले संज्ञेय अपराध नहीं है.

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