यूपीए १ और २ के साथ भारत के हलाद

आम चुनाव के समय विदेशों में पड़े काले धान का मुद्दा अपने चरम पर था बीजेपी ने खूब इस मामले को भूनने कि कोशिश की पर कामियाब न हो सकी आम जनता ने एक बार फिर कोंग्रेस के हाथ के साथ अपना विश्वाश जताया पर अब ये विश्वाश भी डगमगाता नज़र आ रहा है हम आपको बतातें हैं की आम चुनाव के समय में सयुंक्त प्रगतिशील गठबंधन ने आम जनता से क्या क्या वादे किये थे और क्या क्या पुरे हुए ....
१) २५ किलो तक अनाज ३ रुपये पार्टी किलो के दर से हर गरीब परिवार को मिलेगा ...
२) विदेशों में कला धन देश में वापस लाना ...
३)दालतों में लंबित पड़े मामलों के तेजी से निबटारे के लिए कुछ उपाय....
४) तीन साल के भीतर गाँव के दूर दराज क्षेत्रों तक इन्टरनेट की सुविधा का प्रबंध ... 
वैसे तो सैकड़ों वादे इस गठबंधन ने किये थे पर हम पहले इन चार वादों पर अगर नज़र डालते हैं तो हमें सरकार की हकीक़त का पता चल जाएगा 
तीन रूपए प्रति किलो कि दर से २५ किलो तक अनाज कि जहाँ तक बात थी उस वादे पर सरकार किस हद तक कायम है ये जनता खुद जानती है .....जो नहीं जानते उनके लिए बता दें कि 
 12 August २०१० को जस्टिस  दलवीर  भंडारी और  जस्टिस  दीपक  वर्मा की बेंच  ने सरकार से कहा कि  वो अनाज वितरण पर ध्यान दे और गरीबी कि रेखा के नीचे जीवन यापन करने वालों को सस्ते दरों पर अनाज मुहैया हो सके इसका ध्यान दे जिसका मतलब साफ़ है कि सरकार ने वादे तो कर दिए थे पर उन्हें पूरा कर पाने में वो सक्षम नहीं है ...  
विदेशों से कला धन देश में वापस लाने पर हमेशा ही बात कि जाती है पर इस पर कोई भी पुख्ता कदम नहीं उठाया जाता है मसलन स्विस वाले जानकारी नहीं दे रहे हैं अरे अमरीका  ये जानकारी हासिल कर सकता है तो हम क्यों नहीं....जर्मन और फ़्रांस के बैंक हमें अपने यहाँ पड़े काले धन का ब्यौरा दे सकते हैं तो स्विस क्यों नहीं और जर्मन और फ़्रांस ने जो ब्यौरा सौंपा है उसे सार्वजनिक क्यों नहीं किया गया कितने नेता उसमे शामिल है मिडिया कहीं से लीक करके ख़बर लाएगी तो कहा जाएगा गैर कानूनी है ..अगर आंकड़े कि बात करे तो 
Black money in Swiss banks — Swiss Banking Association report, 2006 details bank deposits in the territory of Switzerland by nationals of following countries:
Top five
India—- $1,456 billion
Russia —$ 470 billion
UK ——-$390 billion
Ukraine - $100 billion
China —–$ 96 billion

प्रणव मुखर्जी (जो तत्कालीन वित्त मंत्री थे और अब राष्ट्रपति ) ने पत्रकारों से बातचीत करते हुए कहा था कि कैबिनेट ने इस बारे में विस्तृत चर्चा की है। उन्होंने बताया कि सरकार इस मामले पर पांच सूत्रीय एजेंडा बनाकर काम करेगी। हालांकि काले धन को लेकर कोई भरोसेमंद जानकारी अभी नहीं मिल सकी है, लेकिन अनधिकृत रूप से अबप तक दुनिया के 22 देशों में भारतीय मुद्रा के होने की बात सामने आई है। वित्त मंत्री ने सरकारी गंभीरता दिखाते हुए कहा कि काले धन के मुद्दे पर दुनियाभर में 65 देशों के साथ बातचीत की गई है, लेकिन इस बारे में स्विस बैंक ने किसी भी जानकारी को देने से इनकार कर दिया है। काले धन की कुल राशि करीब 500 से 1400 अरब डॉलर के बीच बताई गई है।
सरकार इस मामले पर नए डायरेक्ट कोड के तहत नया कानून लेकर आएगी। इस बारे में सरकार द्वारा कुछ छिपाने से इनकार करते हुए मुखर्जी ने कहा कि सरकार काले धन पर रोक लगाने के लिए विधायी, कानूनी, कूटनीतिक और सूचना संग्रह के अलग-अलग मोर्चो पर काम कर रही है।
चूंकि मामला आयकर से जु़डा हुआ है इसलिए आयकर विभाग की आठ और अंतरराष्ट्रीय टीमें बनाई जाएंगी। ये सभी टीमें दुनियाभर से इस मामले पर जानकारी जुटाएगी। वित्त मंत्री ने कहा कि सरकार ने अंतरराष्ट्रीय मंचों पर इस मुद्दे को उठाया है और टैक्स हैवन देशों से सूचना संग्रहण के लिए कूटनीतिक प्रयास किए हैं। विदेशी बैंकों में काला धन जमा करने वाले लोगों के नामों का खुलासा करने के संबंध में मुखर्जी ने कहा कि मुकदमा चलने के समय ही ये नाम सामने आएंगे

कानून मंत्री वीरप्पा मोयली के  बयान "न्याय पालिका में भी भ्रष्टाचार बढ़ गया है" से मन में क्या संदेह पैदा होता है कि किस गर्त में जा रही है भारतीयों का भविष्य आतंकवाद, भ्रष्टचार, महंगाई , गरीबी ,बीमारियाँ और बेरोजगारी किन किन से जूझेगा एक भारतीय जो गरीब भी है बेरोजगार भी और बीमार भी ............देश में पड़े क़ानूनी लंबित मामले तो ऐसे हैं कि शायद कई पीढियां बीत चुकी हैं मामले बा भी चले जा रहे हैं और ये बदस्तूर और भी आगे कई पीढ़ियों तक जारी रहेंगे ऐसे में आप कोई भी संशोधन कर लो न्याय व्यवस्था में तेजी आने से रही .......

गावों में दूर दराज इलाके में भी इंटर नेट कि सुविधा और बुनियादी तौर पर ग़र देखा जाए तो ये होना भी चाहिए कि न हर घर में सही फिर भी गाँव के बाज़ार में साइबर कफे जैसी सुविधा कमसेकम उपलब्ध हो .....पर तीन साल पूरा होने अभी कुछ ही दिन बचे हैं पर सरकार खुद ये भी भूल गई इसने अपने वादे में क्या क्या कहा था बाहर हाल हम इन्हें याद दिलाते है कि गाँव के दूर दराज़ इलाको में अब भी बिजली एक बड़ी जरुरत बनी हुई है पहेले आ बिजली कि सुविधा करे इंटर नेट कि सुविधा उपलब्ध करा कर भी क्या फायदा जब वो लोगो कि पहुँच से बाहर हो यानी नेट पे काम करने के लिए पहले जेनेरेटर खरीदो वाह भाई वाह  

बात करे  महंगाई की 
तो सरकार ने एलपीजी गैस की सब्सिडी कम करके और डीजल के मूल्यों में वृद्धि करके आम आदमी के जेब में जो आग लगा दी  है | उसकी वजह से देश के हर नागरिक का मन धधक रहा है अमूमन गैस का एक बाटला एक महीने ही चलता है मतलब साफ है कि १२ महीने में १२ गैस का बाटला जिसमें ६ पर सरकार की सब्सिडी रहेगी यानी वो आज के भाव में मिलेंगे और अगले ६ बाटले ७५० रूपए के
आसपास यानी एक बार फिर कांग्रेस सरकार का हाथ आम आदमी पर हथौड़ा बन कर चला है |  सरकार का कहना है कि तेल कंपनियों पर बढ़ते बोझ के कारण उसे ये फैसला मजबूरन लेना पड़ा है ये फैसले की वजह से तेलकंपनियों का घाटा कम होगा और राजकोषीय घाटे को भी कम करने में मदद मिलेगी तो इस पर सरकार से ये सवाल बनता है कि भ्रष्टाचार से जो राजकोषीय घटे में निरंतर वृद्धि हो रही है उसके लिए सरकार क्या कदम उठा रही है वहां तो सिर्फ वादे किये जाते हैं कि हम कार्यवाई कर रहे हैं और कुछ भी नहीं किया जाता करोडो करोड़ आम जनता के रूपए भ्रष्ट नेता स्विस बैंक में जमा करवा देतें है जितनी मुस्तैदी से सरकार आम जनता पर अपना हथौड़ा चला देती है उसकी आधी भी मुस्तैदी अगर वहां दिखाए तो ये पेट्रोलियम पदार्थ पर सब्सिडी कम करने की  नौबत ही न आए खैर आपको बता दें कि तेल कंपनियों का रोना क्या है ? मौजूदा दशा
में भारत पेट्रोलियम, हिंदुस्तान पेट्रोलियम और इंडियन ऑयल की राजस्व हानि चालू वित्त वर्ष 1.87 लाख करोड़ से अधिक पहुंचने का अनुमान लगाया गया था। सीसीपीए ने कहा कि तेल विपणन कंपनियों के राजस्व हानि की भरपाई पूरी तरह न होने के कारण उन्हें नुकसान होता है। सरकार इस निर्णय से तेल विपणन कंपनियों को मूल्य नियंत्रण व्यवस्था के कारण होने वाले राजस्व हानि में करीब 20,300 करोड़ रुपये की राहत लनेकी उम्मीद है। बावजूद इसके चालू वित्त वर्ष इन कंपनियों की कमाई का नुकसान 1.67 लाख करोड़ रुपये रहने का अनुमान है। पिछले वित्त वर्ष 2011-12 में आयातित उत्पाद की तुलना में घरेलू बाजार में कीमतें कम रखने के कारण इन कंपनियों को सरकारी कंपनियों को करीब 1.39 लाख करोड़ रुपये की संभावित कमाई का नुकसान हुआ था।सरकार ने कहा है कि डीजल के दामों में प्रतिलीटर 5 रुपये की वृद्धि में वैट शामिल नहीं ।इस बढ़ोतरी में 1.5 रुपये की वृद्धि उत्पाद शुल्कमें वृद्धि के कारण हुई है। बाकी 3.50 रुपये प्रतिलीटर तेल कंपनियों के खाते में जाएगा। इससे उन्हें चालू वित्त वर्ष में की शेष अवधि में15,000 करोड़ रुपये का फायदा होने की उम्मीद है। इस वृद्धि के बाद भी डीजल पर उनकी संभावित राजस्व हानि 1.03 लाख करोड़ रुपये रह जाएगी। दिल्ली में डीजल का संशोधित मूल्य करीब ४७ रुपये प्रति लीटर हो जाएगा। इसमें 12.5 प्रतिशत वैट (मूल्य वर्धित कर) शामिल है। सरकार ने ब्रांडेड डीजल को बाजार दर पर बेचने की अनुमति देने का फैसला किया है। दिल्ली में सब्सिडीशुदा रसोई गैस सिलेंडर का दाम ३९९ रुपये बना रहेगा। पर सरकार का अनुमान है कि पूरे देश में एलपीजी सिलेंडर पर सब्सिडी सीमित  करने के आज के निर्णय से तेल कंपनियों को 5033 करोड़ एपये का फायदा होगा।सरकारी तेल कंपनियों को नियंत्रित दर परडीजल और रसोई गैस और अन्य ईंधन की बिक्री से रोजाना 560 करोड़ रुपए का नुकसान हो रहा था। पेट्रोल पर 16 करोड़ रुपये प्रतिदिन कानुकसान हो रहा था। सब्सिडी बोझ बढ़ने और आर्थिक नरमी के चलते सरकार का राजकोषीयघाटा बढ़ता जा रहा है। वर्ष 2011-12 में राजकोष् घाटा सकल घरेलू उत्पाद का 5.1प्रतिशत था जो चालू वित्त वर्ष में बढ़कर 5.9प्रतिशत हो जाने का अनुमान है। आपको बता दें कि ये सारे आंकड़े सरकार सिर्फ इस लिए दिखाती है क्योंकि उसके पास दिखने के लिए बस यही है उसके पास भ्रष्टाचार को रोकने कि शक्ति ही नहीं है ये महंगाई उसी का कारण है एक भ्रष्ट सरकार क्या भ्रष्टाचार से लड़ सकतीहै और महंगाई कम कर सकती है ये सोचने का विषय है |

बात करे भ्रष्टाचार की 
देश को चलाने के लिए हर साल करीब 13 लाख करोड़ रुपये की  जरुरत होती है , आमदनी मात्र 8 से 9 लाख करोड़ के आस पास ही होती है  यानी हर साल वित्तीय घाटा बढ़ता है. जो देश के विकास को बुरी तरह प्रभावित करता है. वित्तीय घाटे का सबसे बड़ा कारण है घोटाला, ये घोटाले अगर न होते तो निरंतर बढ़ रहा वित्तीय घाटा न होता बल्कि उसकी जगह  मुनाफा होता और उस मुनाफे से सरकार और नई परियोजनाएं बना सकती थी जिससे देश की जीडीपी और आर्थिक विकास दर भी बढ़ती. अंग्रेजों ने 200  साल देश का दोहन किया आजादी के बाद से  इसे अपने लोग ही लूट रहे हैं हम आजाद कहाँ हुए हैं ?हम तब भी गुलाम थे अब भी गुलाम हैं भुखमरी, त्रासदी और अत्याचार तब भी थे और अब भी हैं .चंद लोगों के आमिर हो जाने से पूरा देश आमिर नहीं हो जाता है . नित नए घोटाले ने देश के आर्थिक विकास की कमर तोड़ रखी है एक से बढ़कर एक घोटाले सब के सब कई हजार करोड़ और अब तो कई लाख करोड़ तक . जिससे नित नए बिजली के प्लांट लग सकते थे , देश में कई सरकारी अस्पताल बन सकते थे, स्कुल और कई बड़े कल कारखाने  बनाए जा सकते थे इसके अलावा  इसके आलावा सडकों का निर्माण भी किया जा सकता था जिससे न सिर्फ लाखों बेरोजगारों को नौकरी मिल सकती थी बल्कि आम लोगों का जीवन स्तर भी सुधार सकता था और सही मायने में देश का विकास भी किया जा सकता था पर ऐसा कुछ भी नहीं हुआ बल्कि देश के भ्रष्ट भेड़ियों ने इस देश को भूखा और तंगहाल बना दिया 
सबसे ताजे घोटाले की बात करे तो कैग कि रिपोर्ट के अनुसार सरकार  को 1.86 लाख करोड़ की आमदनी हो सकती थी मतलब साफ तौर पर कोयला ब्लोक आवंटन में गड़बडी के कारण सरकार को ये नुकसान उठाना पड़ा है इस रिपोर्ट को अगर ध्यान से देखें तो ये घाटा और भी ज्यादा बड़ा है 2004 से 2009 के बीच 44 अरब टन कोयले को कम कीमत पर निजी कंपनियों को बेचा गया जिससे होने वाले घटे जोड़ा जाए तो ये करीब 10 लाख करोड़ रुपये बैठता है यानी दो लाख करोड़ रूपए सालाना इसके आलावा पावर प्रोजेक्ट में गड़बड़ी 29000 करोड़ रूपए, दिल्ली एयरपोर्ट के लिए एक निजी कंपनी को औने पौने दाम पर जमीन देने में 1.63 लाख  करोड़ रूपए का घोटाला और विकास शुल्क के नाम पर 3154 करोड़  रूपए की  गड़बड़ी , ये घोटाले करीब 3  लाख करोड़ रूपए के आसपास बैठतें हैं आइए भ्रष्टाचार के दीमक को जरा और अकारिब से देखतें हैं कि , भारत कि अर्थ व्यवस्था को किस तरह आजादी के बाद से अब तक निरंतर खोखला किया  है ....1947 से 2011 तक सैकड़ो घोटाले हो चुके हैं और देश को कई सौ लाख करोड़ का नुकसान हो चुका है। देखा जाए तो देश में घोटाले की बीज आजादी के बाद ही बो दी गई थी। इसकी शुरुआत जीप घोटाले से हुई थी। आजादी के केवल 64 सालों में हमारे भ्रष्टाचार ने 280 लाख करोड़ लूटा है. एक तरफ 200 साल में 1 लाख करोड़ है और दूसरी तरफ केवल 64 सालों में 280 लाख करोड़ है. यानि हर साल लगभग 4.37 लाख करोड़, या हर महीने करीब 36 हजार करोड़ भारतीय मुद्रा स्विस बैंक में इन भ्रष्ट लोगों द्वारा जमा करवाई गई है. इस से पता चलता है कि हम आज कि तारीख में कितने आजाद हैं हम तब भी गुलाम थे और अब भी हैं तब अंग्रेज खून चूस रहे थे अब हमारे अपने ही हक छीन रहे हैं 
भारत को किसी वर्ल्ड बैंक के लोन की कोई दरकार नहीं है. 

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