२ मई २०११ को वैश्विक आतंकवाद के सरगना ओसामा बिन लादेन के मौत की ख़बर के बाद पकिस्तान की दोगली नीति जग जाहिर हो गई है ....बावजूद इसके वह अब भी पूरी दुनिया को बरगलाने का काम कर ही रहा है , जग जाहिर है कि भारत के आतंक का मुखिया दाउद भी उसी की पनाह में है ....और न सिर्फ दाउद बल्कि २६/११ हमले के वांछित आतंकवादी भी उसीकी सरजमीं पर बेख़ौफ़ और बेहद सुरक्षित हैं...... पर पकिस्तान इन सारी बातों को हमेशा से ही सिरे से ख़ारिज करता आ रहा है ..... हर बार उसकी पोल खुल भी जाती है लेकिन वो फिर भी निर्लाजों की तरह हर बार ये बेशर्मी करता है ....भारत में भी सरकार बराबर किसी बड़े हमले के बाद हरबार पाकिस्तान से दाउद की मांग करती रहती है ...इसबार आतंक के वैश्विक मुखिया कि अमरीका के हाथो मौत कि पुष्टि के बाद भी भारत ने पकिस्तान के आगे वही शिगूफा छेड़ा है ..और आम जनता भी ये सोच कर खुश हो जाती है कि हमारा भारत पाक से आतंकियों को मांग रहा है .....पर वो झूठा झूठ बोलकर हमें इन आतंकियों को सौपता ही नहीं .....हालाकि पाक ये कबूल नहीं करता की आतंकी वहां हैं , पर यदि वो ये कबूल भी कर ले तो भी हमारे मांग भर लेने से वो आतंकी हमें नहीं मिलने वाले उसके लिए पकिस्तान के साथ हमारी प्रत्यर्पण संधि होनी चाहिए जो की नहीं है ....तो सीधी सी बात है की पाक हमें वो आतंकी भिकारियों की तरह मांग लेने पर क्यों दे देगा जिनसे उसे न सिर्फ़ आर्थिक मदद मिल रही है बल्कि हिन्दोस्तान में घुस्स्पैठ करने के लिए मैन पावर भी मिल रहा है ....बहरहाल भारत सरकार भी इस मामले में आम जनता को गुमराह करने से नहीं चुकती की जिस देश के साथ हमारी प्रत्यर्पण संधि ही नहीं है..... हमारी सरकार उनसे भिकारी की तरह रोज़ कभी दाउद माँगते है कभी अन्य आतंकियों की मांग करते हैं ...इस तरह कि माग करके भारत सरकार क्या हासिल करना छाती है कई बार ये समझ से परे चला जाता है .....अमरीका को भी कई महीने पहले ही खबर लग गई थी कि ओसामा बिनलादेन पकिस्तान में है वह भी ओसामा को पकिस्तान से मांग सकता था .....भारत से ज्यादा जोर देकर वो ओसामा की मांग कर सकता था और पकिस्तान शायद दे भी देता लेकिन अमरीकी सरकार ने ऐसा नहीं कई वो पकिस्तान की दोगली नीति जनता था .....उसने वही किया जो उसे सही मायने में करना चाहिए था .....पर भारत सरकार ऐसा कुछ नहीं कर सकती... वो चाहे तो खुद भी इन आतंकियों को पाक की ही सरजमीं पर मार गिरा सकती है ....पर हमारी सरकार ऐसा करेगी नहीं ......क्योंकि उसे इस आतंक वाद से भी जरुरी कई ऐसी काम करने हैं जो उसे इस मुद्दे से ज्यादा जरुरी लगते हैं ....मसलन चुनावी प्रचार रैलियाँ , घोटालें, आरोप प्रत्यारोप इसके आलावा और भी कई काम है हमारी सरकार के पास विपक्ष भी सरकार को बस उन्ही बातो में घेरता नज़र आता है जो बस उसे अपनी छीछालेदर होने से रोक सके और सरकार को कोई जवाब न मिले आतंकवाद एक ऐसा मुदा है जहा पर सरकार और विपक्ष को मिलकर और ऐसे कदम उठाना चाहिए कि आम जनता के हित में हों ....हमारे गृह मंत्री जो अंतरराष्ट्रिय स्टार पे मजाक का सबब बने हुए हैं उन पर हमें शर्म नहीं आनी चाहिए .....जिस देश कि जनता सिर्फ़ इतने से खुश हो जाती है कि हमारा देश मांग तो रहा है आतंकियों को अब पाक वाले देते ही नहीं तो हम क्या करे उस देश का गृह ,मंत्री अगर पाकिस्तान भेजी गई ५० वांछित आतंकियों कि सूचि में एक आद नाम गड़बड़ कर दे कोई इतनी बुरी बात तो नहीं है कि उसे निलंबित कर दिया जान चाहिए ...बल्कि उसे खुद शर्म आनी चाहिए और अपने पड़ से इस्तीफा दे देना चाहिए ...जब तक आम जनता सोती रहेगी .....गरीब सरकार इसी तरह भिक मांगती रहेगी .....और सरकारी खजाने भ्रष्टाचारियों हांथों लुटे रहेंगे
Comments
Post a Comment